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29 अगस्त ईपेपर: 2030 तक मलेरिया मुक्त होगा भारत: मामलों और मौतों में 80% की ऐतिहासिक कमी, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कसी कमर

🚨 ब्रेकिंग न्यूज़: 2030 तक मलेरिया मुक्त होगा भारत ✦ मामलों और मौतों में आई 80% की ऐतिहासिक कमी ✦ देश के 160 जिलों में मलेरिया के 'शून्य' केस दर्ज ✦ स्वास्थ्य मंत्रालय ने कसी कमर, अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश! 🚨

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2030 तक मलेरिया मुक्त होगा भारत: मामलों में आई 80% की भारी कमी, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिए सख्त निर्देश।

नई दिल्ली (MSC NEWS NETWORK DESK) —भारत की धरती से एक ऐसी बीमारी को विदा करने का समय आ गया है जिसने सदियों से अनगिनत परिवारों के चिराग बुझाए हैं। 'मलेरिया मुक्त भारत' का सपना अब महज़ एक सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि एक हकीकत बनता नजर आ रहा है। 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के सतत विकास लक्ष्य (SDG) को प्राप्त करने के प्रति भारत सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता को और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की मिशन निदेशक श्रीमती आराधना पटनायक ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC), राज्यों के मिशन निदेशक और अत्यधिक प्रभावित जिलों के जिलाधिकारी शामिल हुए।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती आराधना पटनायक के नेतृत्व में हुई उच्च स्तरीय बैठक में जो आँकड़े सामने आए, वे देश के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं हैं। वर्ष 2015 से 2025 के बीच भारत में मलेरिया के मामलों और इससे होने वाली मौतों में लगभग 80 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है, जो लाखों जिंदगियों के बचने की सुखद कहानी बयां करती है। बैठक के दौरान प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जहाँ कभी देश में 155 अति-प्रभावित (खतरे वाले) जिले थे, वे अब सिमटकर महज़ 33 रह गए हैं। निरंतर और केंद्रित जन स्वास्थ्य प्रयासों के माध्यम से भारत ने मलेरिया के प्रभाव को कम करने में एक ऐतिहासिक और बड़ी सफलता हासिल की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2025 के बीच देश में मलेरिया के मामलों और इससे होने वाली मौतों में लगभग 80 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। उच्च प्रभाव वाले अत्यधिक प्रभावित जिलों की संख्या जो पहले 155 थी, वह अब घटकर मात्र 33 रह गई है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर बीमारी की निरंतर रोकथाम के चलते 2022 से 2025 के दौरान देश के 160 जिलों ने शून्य स्थानीय मलेरिया मामलों (एक भी नया केस नहीं) की रिपोर्ट दी है।

देश के 160 जिलों की 'जीरो केस' रिपोर्ट उस खामोश क्रांति का प्रमाण है, जो दूरदराज के गाँवों और जंगलों में स्वास्थ्य कर्मियों के पसीने से लिखी गई है। श्रीमती पटनायक ने संकल्प की दृढ़ता दिखाते हुए स्पष्ट किया कि 'इलाज में देरी ही मौत का मुख्य कारण है', इसलिए दुर्गम पहाड़ों से लेकर रेतीले धोरों तक दवाओं और जांच किट की निर्बाध पहुँच ही हमारा सबसे बड़ा कवच है। इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उन 33 अति-प्रभावित जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें 2025 के दौरान दर्ज कुल मलेरिया मामलों का 64 प्रतिशत और मौतों का 54 प्रतिशत हिस्सा शामिल था। श्रीमती आराधना पटनायक ने मलेरिया के प्रभावी रोकथाम और उन्मूलन के लिए 'जांच, उपचार और निगरानी' की रणनीति को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निदान और उपचार में होने वाली देरी ही मलेरिया से होने वाली मौतों का सबसे मुख्य कारण है, इसलिए दुर्गम इलाकों में नैदानिक किट और मलेरिया-रोधी दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मलेरिया को जड़ से खत्म करने के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए जलभराव को रोकने, मच्छरों के पनपने वाले स्रोतों को खत्म करने और पर्यावरण प्रबंधन हेतु ग्रामीण तथा शहरी विकास विभागों और पंचायती राज संस्थाओं के साथ आपसी समन्वय स्थापित करना नितांत आवश्यक है। इसके साथ ही, डेटा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि व्यापक जांच के दौरान पाए गए बिना लक्षण वाले (asymptomatic) मामलों को अलग से दर्ज किया जाए, ताकि मलेरिया कार्यक्रम के प्रदर्शन का बिल्कुल सटीक मूल्यांकन हो सके।

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